Autoimmune Disease in Hindi 2023


ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune Disease) - कारण, लक्षण और उपचार Autoimmune Disease Causes, Symptoms and Remedies

ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज लक्षणों को प्रबंधित करके, सूजन को कम करके और अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाकर किया जाता है।
आज हम ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए सबसे आशाजनक उपचारों में से एक पर आज चर्चा करेंगे।

#1. ऑटोइम्यून रोग क्या है? What is Autoimmune Disease?

एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को बीमारी और संक्रमण से बचाती है। हालांकि, जब प्रतिरक्षा प्रणाली खराब हो जाती है, तो यह गलत तरीके से स्वस्थ कोशिकाओं (Cells), ऊतकों (Tissues) और अंगों (Organs)पर हमला करती है। इन बीमारियों को ऑटोइम्यून (Autoimmune Disease) बीमारी के नाम से जाना जाता है।

#2.ऑटोइम्यून बीमारियों के संभावित कारण:

  • आपके वीडीआर VDR (विटामिन डी रिसेप्टर) में समस्या (Problem with your VDR)
  • एंटीबायोटिक्स (Antibiotics)
  • अधिक तनाव (Major Stress)
  • गट माइक्रोबायोम (अच्छे बैक्टीरिया) कम होना (Loss of the Gut Microbes)
  • छिद्रयुक्त आंत (Leaky Gut)
  • कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
  • ड्रग्स (Drugs)
  • रसायन (Chemicals)

#3.ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण क्या हैं?

ऑटोइम्यून रोगों के विभिन्न प्रकारों के बावजूद, उनमें से कई में समान लक्षण होते हैं। ऑटोइम्यून रोग के सामान्य लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
  • जोड़ों का दर्द और सूजन
  • त्वचा संबंधी समस्याएं
  • थकान
  • पेट दर्द या पाचन संबंधी समस्याएं
  • सूजन ग्रंथियां
  • बार-बार बुखार आना

#4.सामान्य ऑटोइम्यून विकारों में शामिल हैं:

  • रूमेटाइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis)
  • सोरायसिस (Psoriasis)
  • थायराइड रोग (Thyroid Disease)
  • सोरियाटिक अर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis)
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis)
  • टाइप 1 मधुमेह (Type 1 Diabetes)
  • ल्यूपस (Lupus)


#5. क्या ऑटोइम्यून बीमारी ठीक हो सकती है

ऑटोइम्यून बीमारी बीमारी ठीक हो सकती है तो चलिए ऑटोइम्यून बिमारियों के लिए सबसे अच्छे उपचार प्रणाली की बात करेंगे।यह जानकारी एक प्रोटोकॉल (उपचार प्रणाली) पर आधारित है, जिसे डॉक्टर कोइम्ब्रा ने विकसित किया है।
डॉ कोइम्ब्रा के अनुसार, “ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune disease)है और ऑटोइम्यून रोग से पीड़ित व्यक्तियों में अपर्याप्त विटामिन डी का स्तर हो सकता है, साथ ही साथ विटामिन डी का प्रतिरोध भी हो सकता है।”
ऑटोइम्यून रोगों से पीड़ित मरीजों में, विटामिन D के स्तर को बढ़ाने के लिए, सामान्य मरीजों की तुलना में ऑटोइम्यून रोग के मरीजों को इसकी बहुत अधिक मात्रा लेनी पड़ सकती है।
विटामिन डी कोशिकीय कार्यों (Cellular functions) की एक विस्तृत श्रृंखला को नियमित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,जिनमें प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) से संबंधित शामिल है|इसके अतिरिक्त, विटामिन डी सूजन को कम करने के लिए जाना जाता है, जो ऑटोइम्यून बीमारियों में देखा जाता है।

#विटामिन डी थेरेपी (Vitamin D Therapy)

कृपया याद रखें कि डॉ कोईंब्रा प्रोटोकॉल की शुरुआत करने के लिए ऐसे डॉक्टर से जिन्हें डॉ कोईंब्रा प्रोटोकॉल का अनुभव हो।वे आपके इस इस प्रोटोकॉल को पूरा करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
इस उपचार पद्धति मरीज क प्रतिदिन 30,000 IU से 200,000 IU तक विटामिन डी3 (Vitamin D3) की मात्रा को कुछ महीनों के लिए दी जाती है। इसलिए, यह इलाज हमेशा एक चिकित्सा विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
डॉक्टरों द्वारा उपचार के दौरान, सही विटामिन डी कार्यात्मक स्थिति प्राप्त करने के लिए पीटीएच (PTH- Parathyroid Hormone) के स्तर को समय-समय पर मापा जाता है।पीटीएच स्तर सीमा के अंदर रहता है तो विटामिन डी विषाक्तता दुर्लभ है। आपके पैराथाइरोइड हॉर्मोन को सामान्य से भी निचले स्तर पर लेकर जाना इस प्रोटोकॉल का उद्देश्य है।
इस प्रोटोकॉल के मुख्य दुष्प्रभाव (हाइपरकैल्सिमिया) को रखने के लिए डॉक्टरों द्वारा आयनिक कैल्शियम (Ionic Calcium)के स्तर को मापकर आहार के माध्यम से कैल्शियम सेवन की समय-समय पर निगरानी की जाती है।जो रोगी इस उपचार का पालन कर रहे हैं उन्हें डेयरी, नट्स, कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
उपचार योजना को उचित रूप से समायोजित करने के लिए, किसी भी गुर्दे (किडनी) से संबंधित मामलों के बारे में डॉक्टर को पहले से सूचित करना महत्वपूर्ण है।
प्रतिदिन 2.5-3 लीटर पानी और द्रव पदार्थ का सेवन आवश्यक है।
डॉक्टर लैब टेस्ट के नतीजों के आधार यह निर्धारित करेंगे कि क्या आहार का ठीक से पालन किया जा रहा है या अधिक प्रतिबंधों की आवश्यकता है या नहीं।
विटामिन डी को सही तरह से कार्य करने के लिए, इसे के साथ मैग्नीशियम (Magnesium), ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acids), विटामिन बी2 और बी12 (Vitamin B2 and B12), ज़िंक (Zinc), विटामिन के2-7 (Vitamin K2-7), सेलेनियम (Selenium) जैसी विशेष दवाइयों (supplements) की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष Conclusion

यह उपचार पद्धति निश्चित रूप से किसी भी पारंपरिक उपचार की तुलना में अधिक सुरक्षित है। एक जानकार डॉक्टर के मार्गदर्शन में विटामिन डी3 थेरेपी (Vitamin D3 therapy) से उपचार करने पर हर प्रकार के ऑटोइम्यून बीमारी ठीक को ठीक किया जा सकता है।


References:

https://www.coimbraprotocol.com/the-protocol-1
https://www.renumahtani.com/psoriasis-can-be-cured
https://www.google.com/maps/d/u/0/viewer?mid=1fATZJUEhOsYYJdBY41h48FBkLaQ&ll=19.19212039288209%2C-24.66098360000001&z=2o